- मध्य प्रदेश Post by Admin on 30-10-2024 03:26:19pm
मध्यप्रदेश /भिंड /( संवाददाता )/ भारत देश में हिंदू त्योहारों की तिथि को लेकर तब संशय उत्पन्न हो जाता है जब कुछ धर्मावलंबी के अधूरे ज्ञान के चलते त्योहारों की तिथियों में फेरबदल कर देते हैं । जिसकी वजह से त्योहारों की तिथि में लोगों को संशय हो जाता है इसी को दृष्टिगत रखते हुए जिले के जाने माने ज्योतिषाचार्य आचार्य पंडित डॉ रामलखन महेरे शास्त्री जी ने आगामी दीपावली त्यौहार की तिथि 1 नवंबर को ही शास्त्र सम्मत माना है और उन्होंने आम जनमानस से अपील भी की है कि हिन्दू धर्म शास्त्रों के निर्णय अनुसार ही यह तिथि निकली है जो सभी के लिए शुभ फल कारी है। शास्त्री जी ने आगे कहा कि चतुर्दशी के वेध में दीपावली मनाना होता है हानिकारक।। प्रतिपदा के योग में दीपावली होती है अक्षय पुण्य कारक।। दीपावलीपर्व किस दिन मनायें इसका निर्णय धर्मसिंधु,तिथिनिर्णय,निर्णयसिन्धु,जयसिंह कल्पद्रुम, पुरुषार्थ चिंतामणि, काल तत्व विवेचन, आदि प्रमाणिक धर्म ग्रंथो के अनुसार किया जाता है।शीघ्र बोध पुस्तक की ज्योतिष क्षेत्र में मान्यता नगड्य है, एवं व्रत पर्व निर्णय में इसकी कोई भूमिका नहीं है। इसमें जो श्लोक दिया हुआ है वह भी पुराणो में प्राप्त नहीं होता है। 31 तारीख को चतुर्दशी सायं काल ग्वालियर अक्षांश पर भी 15:51 तक है जो कि 23 घटी 36 पल है , चतुर्दशी तिथि 18 घटी मान होने पर ही अमावस्या का वेध करती है ,धर्मशास्त्र कहता है कि चतुर्दशी विद्ध अमावस्या में पर्व नहीं मनाया जाता है, ऐसा करने से सौ जन्मो के पुण्य नष्ट होते हैं और नर्क की प्राप्ति होती है, इस दिन सायं काल में पितरों के लिए उल्का दर्शन करने का धर्मशास्त्र ने कहा है, एवं मध्य रात्रि में भगवती महाकाली दुर्गा चंडी की आराधना करने का प्रावधान प्राप्त होता है दीपोत्सव का नहीं, चतुर्दशी विद्धा दीप उत्सव धर्मशास्त्र निषेध करता है, अमावस्या जब दो दिन व्याप्त हो तो दूसरे दिन सूर्य अस्त के बाद एक घटी से कम भी हो तब भी मान्य है और वहां से वह संपूर्ण रात्रि साकल्यापादित तिथि मानी जाती है क्योंकि अमावस्या एवं प्रतिपदा का युग्म ही महान पुण्य कारक है चतुर्दशी अमावस्या का नहीं । यह तिथि निर्णय का सिद्धांत है। धर्म शास्त्रों की दृष्टि में दीपावली का मुख्य कर्म काल प्रदोष है मध्य रात्रि नहीं, मध्य रात्रि में तो लक्ष्मी का भ्रमण होता है दरिद्र का निष्कासन होता है, इस दिन स्वातिनक्षत्र का संयोग होने के कारण अद्भुत समृद्धि और सुख कारक है, यह ज्योतिर्निबंध का कथन है।अतः इस निर्णय के अनुसार धर्मशास्त्र संगत दीपावली पर्व 1 नवंबर को ही है। भ्रमित ना हो भारत के सभी दृश्य पंचांग कार, एवं धर्मशास्त्र निर्णायक इसका निर्णय 1 नवंबर के लिए ही निर्धारित करते हैं। यह निर्णय कांची काम कोटि पीठ के शंकराचार्य जी महाराज के समक्ष अगस्त 2023 में हुआ था। अतः 1 नवंबर को प्रातः अरुणोदय काल में 4:00 बजे,अभ्यंग स्नान करें , सायं काल 1:30 बजे से 3:00 बजे के मध्य पार्वण श्राद्ध करें, सायं काल 6:00 बजे से 8: 30 बजे के मध्य दीपोत्सव लक्ष्मी पूजन करें ,यहां यह विचार बिल्कुल न करें की अमावस्या समाप्त हो रही है क्योंकि अमावस्या यहां से साकल्या पादित तिथि मानी जाएगी, अतः संपूर्ण रात्रि पूजन साधना आराधना के लिए शुभ है।इस दिन में वृश्चिक, कुंभ ,लग्न,मध्यान में अभिजित मुहूर्त, व्यापारिक प्रतिष्ठान आदि के लिए शुभ है। सायं काल प्रदोष , वृषभ लग्न , रात्रि में सिंह लग्न साधना हेतु उत्तम है। पूर्व वर्षो में भी बहुत बार ऐसी स्थिति बनी है।.उस समय भी दीपावली दूसरे दिन प्रतिपदायुक्ता ही सर्वसम्मति से मनाई गई थी। इस वर्ष तो स्वाति नक्षत्र, का विशेष संयोग है, पितृपूजन की प्राथमिकता, उदयातिथी प्रदोष व्यापिनी,एवं अमावस्या प्रतिपदायुक्ता आदि सभी योग१नवम्बर के दिन ही घटित हो रहें हैं, अतःनिर्विवाद रूप से दीपावली पर्व को 1 नवंबर 2024 को मनाएं,जो कि शास्त्र सम्मत होगा,

