- मध्य प्रदेश Post by Admin on 03-09-2022 11:08:06pm
भिंड[ मुकेश मिश्रा] देश दुनिया में अर्थ की बढ़ती महत्वता से लुप्त होती जा रही देशभक्ति के बीच आज भिंड में देश प्रेम का उदाहरण मिला है। लगभग 147 वर्षों के बाद परिवार की चौथी पीढ़ी ने अपने पुरखों की सरजमी पर उनकी याद में परिवार द्वारा दान कर शिक्षा का मंदिर स्कूल का आधुनिकता से निर्माण कराकर आज जिला प्रशासन की मौजूदगी में दीप प्रज्वलित कर एवं फीता काटकर उद्घाटन किया गया है । दरअसल वाक्या कुछ इस तरह है कि भिंड जिले के तेहसील अटेर के अंतर्गत भगवंतपुरा गांव के पूर्व निवासी श्री प्रेम राज महाराज 1875 में प्लासी (कोलकाता) के जहाज पर दक्षिण अफ्रीका गए थे। उनकी याद में लगभग 147 वर्ष बाद उनकी चौथी पीढ़ी ने भारत लौटने के बाद श्री शिन्धुदेव महाराज और उनके परिवार द्वारा दान कर स्कूल बनाया गया है । स्कूल इस बात की मिसाल है कि सरहदें बेशक पार हो लेकिन दिल में बसा देश प्रेम आखिर खींच ही लाता है। भिंड वासियों के लिए कहने को एक स्कूल है। लेकिन इसकी नीम कुटुंब, समाज और देश के प्रति समर्पण से रखी गई है। हां यह स्कूल है शिक्षा का मंदिर है ।दिखने में औरों की तरह ही है। लेकिन औरों से इसकी दीवारें इतर हैं , प्रेरणा, जिम्मेदारी, सद्भावना, व देशभक्ति से ओतप्रोत होकर सशक्त रूप से खड़ी है। ऐसे कार्य किसी भी व्यक्ति के लिए देश भक्ति, देश के प्रति प्यार और सम्मान की भावना प्रदर्शित करती है ।ऐसे कार्य उस काल में और महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब लोगों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ लोगों की बदलती जीवन शैली से देश भक्ति लुप्त होती जा रही है ।अतीत के पन्नों को हम पलटे तो देखेंगे कि कई लोग ब्रिटिश शासन काल के दौरान देशवासियों के अंदर देशभक्ति की भावना पैदा करने के लिए आगे आते थे। ऐसा भी नहीं है कि अब देश देशभक्त नहीं है। अतीत में भी देशभक्त थे। और आज भी बहुत से देश भक्त मौजूद है ।आज हम कह सकते हैं कि भिंड की गौरवशाली गाथा यूं ही नहीं लिखी गई। कल भी सिंधु देव महाराज जैसे देशभक्त थे ।और आज मिसाल के तौर पर हम स्कूल को देख रहे हैं । स्कूल की इस इमारत में देशभक्ति की भावना को उजागर किया है। इसी प्रकार से देश में और देश से बाहर रह रहे लोगों को भी ऐसी पहल करना चाहिए।

